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Dec 26, 2017

क्या आप अपनी ideal life के बारे में सोचते हैं?

*दोस्तों अगर मै अपने आस पास देखता हूँ तो मुझे इक्का-दुक्का लोग ही ऐसे दिखते हैं जो अपनी dream life  या ideal life जी रहे हैं. मेरे लिए ये कोई tension की बात नहीं है,पर  जो बात मुझे चिंतित करती है वो ये है कि बहुत कम लोग ही अपनी ideal life के बारे में सोचते हैं , और उससे भी कम उसे पाने का प्रयास करते हैं.*🤔

*Ideal life से मेरा मतलब है एक ऐसी ज़िन्दगी जो आपके लिहाज़ से सबसे अच्छी हो,आपकी मनचाही हो,जिसे आप सच-मुच enjoy करें.*😊

*क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी ideal life कैसी होनी चाहिए*❓

नहीं, तो अभी से सोचना शुरू कर दीजिए🤔‼

*जिंदगी इतनी लम्बी नहीं है कि आप इस ज़रूरी काम को टाल सकें. और  दूसरी  बात  कि  ये  कोई  ऐसी  चीज  भी  नहीं  है  कि  इसे आज  सोचा  और  कल  पूरी  हो  गयी , इसमें  सालों  लग  सकते  हैं  या  एक  दशक  भी ‼ पर  जब  भी  आप  इस  life को  पा  लेंगे  आप  दुनिया  के  सबसे  खुशहाल  लोगों  में  होंगे . इसलिए  आपको  इस  ओर कदम  बढ़ाना  ही  होगा .*‼

*अगर मैं अपनी बात करूँ तो फिलहाल मैं भी अपनी ideal life से दूर हूँ, पर इतना ज़रूर है कि मैं ये जानता हूँ कि मेरी ideal life कैसी होगी और मैं तेजी से उसकी तरफ बढ़ रहा हूँ. और अगले दो – तीन सालों में वो reality होगी.*😊

*मेरे विचार से यदि आपको जानना है कि आपका आदर्श जीवन कैसा होगा तो आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर अपने अंदर ढूँढने होंगे:*-

*आप अपनी ज़िंदगी कहाँ बिताना चाहते हैं?*

*क्या करते हुए  बिताना चाहते हैं* ?

*किन लोगों के साथ     बिताना चाहते हैं ?*

*आप अपना जीवन किस क्वालिटी का देखना चाहते हैं  यानी लाइफ स्टाइल कैसा देखना और जीना चाहते हैं*?

*आप क्या क्या भौतिक सुख सुविधाएं हासिल करना चाहते हैं?*

*समाज में आप अपना स्थान किस प्रकार और कितना महत्वपूर्ण देखना चाहते हैं*?

*आप भावी पीढियों को किस प्रकार की और कितनी  विरासत बनाकर देना चाहते हैं?*

*आप समाज को क्या और किस प्रकार से योगदान कर सकते हैं?*

*🗣और ये ध्यान रखना होगा कि इन प्रश्नों के उत्तर आपके अंदर की आवाज़ हैं ना  कि society को impress करने के लिए कही गयी बातें.*

*👉🏻अगर आपने ऐसा पहले से ही सोच रखा है तो इससे बेहतर हो ही नहीं सकता हैं,बस आपको इन बातों और सोच को असली जामा पहनाना है, अगर अभी तक नहीं सोचा है तो जितना जल्दी हो सके ऐसा सोच लीजिये और उस दिशा में काम करना शुरू कर दीजिये...*

*ऐसी ही सोच अपने परिवार में पैदा करने और बढ़ाने के लिये इस प्रकार की बातें परिवार के सदस्यों के साथ कीजिये, इससे आप और बड़ा परोपकार करेंगे अपने परिवार पर , समाज पर, देश पर, मानवता पर। ऐसी ही सोच वाले महापुरुषों के समान होतें हैं.*

*आइये इस दिशा में रोजाना एक कदम आगे बढ़े.....*😊

आपका शुभाकाक्षीं
रवींद्र भट्ट......

*आप ही हैं आपके भाग्यविधाता* |How to be creater of own life.

*आप ही हैं आपके भाग्यविधाता*

*हम जो कुछ भी अपने जीवन मे कर रहे हैं, बगैर कारण के नहीं करते, चाहे वह बहुत सामान्य या महत्वपूर्ण ही क्यों न हो*‼

आगे बढ़ने से पहले मैं आपसे कुछ सवाल करना चाहता हूं-

*आप अपने जीवन में चाहते क्या हैं*???

उत्तर मे समाप्त न होने वाली लिस्ट भी बन सकती है ,पर उन सभी को अगर कुछ श्रेणियों मे बाटाँ जाय तो , हम कह सकते हैं कि-

*हम चाहते हैं-*

*  धन* -

धन हमारी बेसिक जरुरतों को पूरा करने के लिये तो चाहिए ही साथ ही और भी जरूरतों को पूरा करने के लिये भी । अगर  सपने भी  हैं ,तो उनको पूरा करने के लिये भी धन यानी money  ही चाहिए । 
*यह सच है कि धन सब कुछ नही है पर यह भी सच है कि बहुत कुछ के लिये धन ही चाहिए*

*जीवन मे सबसे ज्यादा परेशानी धन की कमी से ही होती हैं ।*

अपने जीवन में हम सबसे ज्यादा समय धन कमाने के लिये ही देते हैँ ।धन वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिये ही नहीं चाहिए, बल्कि हर इन्सान धन अपनी इच्छानुसार और मनचाही मात्रा में भी चाहता है ।दूसरों की मदद करना भी मानव प्रकृति है, उसके लिये भी धन चाहिए ।

*  समय* -

हम अपनी ईच्छानुसार समय बिताना तो चाहते हैं पर क्या ऐसा सम्भव है?
अपनी और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए धन कमाना ज्यादातर लोगों की मजबूरी बन गई है, फिर अपनी मर्जी से समय बिताना  कहाँ सम्भव है ।
नौकरी मे सीमित अवकाश  अवधि मे जरूरी कार्यों को निपटारा ही किसी उपलब्धि से कम नहीं है ।
अपने बिजनेस या पेशेवर व्यवसाय मे समय निकालना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है ।

समय की कीमत तब महसूस होती है ,जब समय या तो निकल जाता है या कुछ करने के लिये समय बच ही नहीं रहा होता है ।

*  अच्छा स्वास्थ्य*- 

*WHO के अनुसार दुनिया की कुल जनसंख्या के 5% लोग गम्भीर बीमारियों से पीड़ित हैं, केवल 15% सौभाग्यशाली इंसान ही अपने जीवन मे अभी तक बीमार नहीं हुये हैं पर भविष्य मे कभी बीमार नहीं पड़ेंगे, इसकी कोई  गारंटी नहीं है*
*बाकी 80% लोग कम से कम एक बार बीमार हो चुके हैं ।जिस रफ्तार से अस्पतालों की संख्या. बढ़ रही है, उससे यह बात साफ समझ मे आती है कि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ेगी ही*

समय के साथ , समाज मे स्वस्थ्य जीवन की इच्छा और जागरूकता भी बढ़ रही है ।

एक सर्वे के अनुसार एक औसत भारतीय परिवार सालाना. अपनी पारिवारिक बचत का  40%  बीमारियों के इलाज पर खर्च करता है , जिसे बचाया जा सकता है ।

*  सुरक्षित भविष्य* :

हम अपने वर्तमान की तुलना मे भविष्य के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं । क्योंकि हमारा  वर्तमान जीवन स्तर, आय आदि हमारे काम करने पर ही निर्भर है, भविष्य में हम वह काम करने योग्य रहेंगे या नहीं , हमारा काम कैसा चलेगा, इन बातों पर हमारा कोई कंट्रोल नही होता है ।
समय के साथ साथ नौकरियों, व्यापार सब में प्रतियोगिता बढ़ती ही रहती हैँ ।बहुत से जाने ,अनजाने कारण भी हमारी असुरक्षा की भावनाओं को समय समय पर और भी गंभीर बना देती हैं ।

*  मान - सम्मान*:

हर इंसान की मान सम्मान पाने की ,असीम इच्छा रहती है ।
अपने परिवार, समाज, राज्य ,देश- दुनिया मे नाम रौशन करने के लिये प्रयत्न भी करते हैं ,समाज सेवा आदि काम हमारी इसी इच्छा के परिणाम हैँ

*अब यहाँ पर बहुत ही महत्वपूर्ण बात सामने आती हैँ कि, इन सब बातों की जरूरत हम सभी को है*?????

*जो काम हम कर रहे हैं*-
*क्या उस काम से यह सब हमें मिल रहा है*? ????????

*या मिल सकता है*???


Dec 8, 2017

सोचिये...क्योंकि जिदंगी आपकी ही है!!| How to Think and live a life of Choice

*जीवन कैसा है? पर कैसा हो?*⁉⁉
*सोचिये...... जरूर....क्योंकि जिदंगी तो आपकी ही है...*

*इंसान गुफाओं से निकलकर आज आधुनिक विकास का आनंद उठा रहा है । समय गुजरने के साथ साथ जरूरत़ें भी बढ़ जाती हैं ।ऐसा हर इंसान और परिवार के साथ हो रहा है ।*

*अपनी और परिवार की बढ़ती जरुरतों को पूरा करने की आपाधापी में इस एक बार मिलने वाले जीवन को कैसे आंनदपूर्वक जीया जाये?*
हर कोई जीवन जी तो रहा है पर कुछ न कुछ छूटता रहता है ।

*जिदंगी की गुजर बसर करने के लिये रूपये कमाना मजबूरी है ,ईच्छा नहीं ।*

*कोई अपनी जरूरत भर का भी नहीं कमा पा रहा है तो, कोई जरुरत से अधिक ।*

*किसी का स्वास्थ्य फिलहाल ठीक है तो, किसी का नहीं , समय के साथ स्वास्थ्य की समस्या हर घर मे बढ़ती जा रहीं हैं ।*

*किसी के पास समय ही समय है तो, किसी के पास जीवन का आंनद लेने की फुर्सत ही नहीं है ।*

*कोई मेहनत करने के बावजूद भी संघर्ष ही कर रहा है तो कोई बगैर किसी खास शिक्षा और कौशल के सफलताओं के झंडे गाड़ देता है*। 

*कोई मान सम्मान की परवाह ही नहीं करता  तो, कोई अपनी मान सम्मान की रक्षा के लिये अपनी जान भी दे देता है और ले भी लेता है ।*

*कोई समाज सेवा के लिये अपना जीवन न्यौछावर कर देता है तो,कोई आपराधिक जीवन जीने का रास्ता अपना लेता है ।*

*कोई अपनी ईच्छा से काम कर रहा है तो, कोई मजबूरी में ।*
*कोई धर्म करम को ही जीवन मान लेता तो कोई भोग विलास को ही ।*

*हर इंसान के मन में कसक रहती ही रहती है , काश ऐसा हो जाता ,आदि आदि ।*

इन सब बातों का निचोड़ यही हे कि जीवन कैसा होना चाहिये ,इस पर किसी की एक राय नहीं है ,न ही कोई ऐसी सही सलाह देता है ।

*ऐसी सलाह देना और मिलना मुश्किल ही है क्योंकि ऐसी शिक्षा न तो स्कूल, कालेज में मिलती है न ही माँ बाप को पता है ।*

वाकई यह असमंजस की स्थिति है और इस स्थिति में भ्रम का शिकार होना बड़ा आसान हो जाता है । आपको कोई भी किसी भी एक बात से प्रभावित कर सकता है ।😳

*इतिहास और  वर्तमान में  लोगों के अनुभवों के आधार पर  और भविष्य के अनुमान के  आधार पर एक सुखी -समृध्द जीवन के मूल आधार हैं-*

*धन-सम्पत्ति -Wealth*
*स्वास्थ्य- Health*
*समय -Time*
*सुरक्षित भविष्य -Secured Future*
*सामाजिक मान सम्मान- Recognition.*

*जिस इंसान के पास ये सभी हैं, वाकई उसी का जीवन सुखी समृध्द जीवन है*😃

इन सब में से किसी की कमी से जीवन में छटपहाट और संघर्ष ही रहेगा ।

आम तौर पर अधिकांश लोगों के जीवन में यह सब नहीं होता है ,इसीलिये उनका जीवन संघर्षों से भरा होता है । 

*यह संघर्ष हो सकता है आमदनी के लिये हो या स्वास्थ्य का, या समय की कमी या समाज में मान सम्मान पाने का या भविष्य की चिंता ।*

अधिकतर  लोगों की सोच यह बन चुकी है कि यह सब एक साथ मिलना असंभव है और जैसा जीवन चल रहा है , वैसे ही  चलने दो***😕*

*क्योंकि हमें अपने आसपास, कोई भी भी इंसान ऐसा नहीं मिलता है जिसके पास यह सब हो, इसीलिए हमारी सोच ऐसी बन गयी है।*

*जो मुठ्ठी भर लोग ऐसे कामयाब हो गये हैं, वे अपने आप बहुत बड़े अंहकार के मालिक बन गये हैं कि दूसरों को ऊपर ऊठाने की सोचते भी नहीं हैं ।*

*समाज में यह सोच बन गयी है जिसकेपास जितना ज्यादा धन संपत्ति होगी , वही बड़ा आदमी माना जायेगा🤔*

थोड़े बहुत लोग खूब रुपया पैंसा कमाकर धन संपत्ति जमा करके अपने आप को संतुष्ट कर लेते हैं कि चलो जीवन में अब मजा आयेगा। उनकी इस सोच के हिसाब से वे ठीक ही हैं क्योंकि अधिकांश चीजेँ रूपयों से आती हैं ।पर बाकी चीजें छूट जाती है।

  
*सच्चाई तो यह कि हर इंसान इन सबको पा सकता है । बस इन बातों को समझना -सीखना पड़ता है और उनको पाने का रास्तें पर चलना पड़ता है ।*

**********************
*मेरे डायनामिक सपोर्ट सिस्टम का उद्देश्य ही यही है कि हर व्यक्ति को सही सोच,जानकारी, मार्गदर्शन ,रास्ता और सहयोग मिले सही कामयाबी के लिये।****************

अगली बार एक एक बात पर विस्तार पूर्वक बात करूँगा ।

*अगर आपको ये बातें ठीक लगती हैं या  अपने अनुभव साझा करना चाहते हैं तो कृपया कमेंट जरूर करें।*

आपके सुखी- समृध्द जीवन की शुभकामनाओं सहित  आपका शुभाकाक्षीं-

रवींद्र भट्ट 

Dec 4, 2017

कैरियर कैसा होना चाहिए | How should be a Right career

*रास्ता वही सही ,जो मंजिल तक पहुँचाये!-कैरियर...*

*हर स्टुडेंट की सबसे बड़ी फिक्र - मेरा कैरियर क्या होगा?*  
*माँ बाप  की भी यही फिक्र- हमारे बच्चे का कैरियर क्या, किस क्षैत्र में होगा?*
*हर व्यक्ति की सबसे बड़ी फिक्र यही है -  मेरे कैरियर का क्या होगा?*

*पर कैरियर का सही  मतलब  है क्या*⁉

*कैरियर किसे कहतें हैं , इसको समझने से पहले यह समझना पड़ेगा कि आप एक व्यक्ति के रूप में अपने जीवनकाल में क्या चाहते हैं?*

 हर व्यक्ति जो अपनी या दूसरों की जरूरतों के लिये जिम्मेदार होता है या होगा, उसे उन जरूरतों को पूरा करने के लिये रूपये यानी धन तो चाहिये होगा।

*हर व्यक्ति की सबसे पहली प्राथमिकता अपनी बेसिक जरूरत़ों को पूरा करना होती है, उसके बाद आरामदायक वस्तुओं की, तब विलासिता की । इसके अलावा अच्छे स्वास्थ्य, सुरक्षित भविष्य, मान सम्मान की चाह आमतौर पर सबकी ही होती है ।  इसके अलावा हाबी या पैशन को आगे बढ़ाना भी चाह हो सकती  है ।*

*जिस साधन से आप यह सभी हासिल कर सकते हैं उसे ही कैरियर कहते हैं ।*

धन  से हासिल होने वाली हर चीज के लिये रूपये हासिल तो करने पड़ेंगे , इसके कई तरीको को अपनाते हैं जैसे- भीख माँगना,चोरी, डकैती ।लेकिन ये तरीके गैरकानूनी और अनैतिक हैं *इसीलिए कोई भी ऐसा पेशा यानी कैरियर कोई भी नहीं अपनाता जो गैरकानूनी और अनैतिक हो* ।

*रूपये प्राप्त करने का सीधा तरीका है आमदनी कमाना ,यानी दूसरों के लिये काम करने के बदले मे रूपये लेना। इसी को इनकम कहते हैं । ऐसी इनकम , नौकरी या खुद चीजों /सेवाओं को बेचने ( सेल्फ इंपल्वायमेंट) से हासिल की जा सकती हैं।*

*इन जरुरतो को सही प्रकार से हासिल करने का जो भी रास्ता अपनाया जाय , वह कानूनी, सम्मानजनक हो साथ ही वह आपकी सभी बेसिक जरूरतों को पूरा कर सके, आपके लिये आरामदायक वस्तुओं को हासिल करने के लिये आपको पर्याप्त धन दे, अगर आपकी लक्जरी जरूरत़ें हैं तो वो भी पूरी हो सकें ।*

अगर किसी कारणवश आप आमदनी कमाने वाला काम न भी कर पाये तो भी इनकम आ सके, ऐसी व्यवस्था भी उस कैरियर में होनी चाहिये।

अच्छी सेहत तो आपके ईच्छा, आमदनी और जीवनशैली से निर्धारित होती है ।

जिनके पास काफी धन दौलत है, वे बहुत  से लोगों को काम पर लगाकर (नौकरी पर लगाकर)  बहुत सा काम कराते हैं( सामान या सेवाएं बेचना ) और बदले में और अधिक आमदनी कमाते हैं, इन्हें ही बिजनेसमैन बोला जाता हैं ।

कुछ धनवान  कोई काम  करने के बजाय उस धन को किसी और के बिजनेस में निवेश कर देते हैं जहाँ से निवेश पर आमदनी मिलती है जिसे ब्याज या डिविडेंड कहते हैं।और ऐसे लोगों को निवेशक यानी इनवेस्टर कहा जाता है।

*इसीलिए कहा जाता है कि आपके पास कानूनी तरीक़े से आमदनी लेने के केवल चार तरीक़े हैं-*

नौकरी....Job

खुद का काम...Self Employment

बिजनेस.... Business

निवेश.... Investment.

*किस काम से आपको ये सभी आपको मिल सकती हैं, वही आपका कैरियर होना चाहिए...*

*अब जरा आप अपने आमदनी के साधन को कैरियर की परिभाषा से मिलाएं*‼‼

 क्या परिणाम ???

*90% लोग आमदनी के लिये नौकरी या खुद का व्यवसाय करते हैं यानी कैरियर की परिभाषा पर खरे नहीं उतरते हैं परिणाम?????*

 समझौते... वो भी कई .....

*आपका कैरियर वही होना चाहिए जो आपको यह सब दे सके...*

*अगर आपका कैरियर यह सब दे रहा है तो आप वाकई बड़े सौभाग्यशाली हैं।*

*अगर नहीं तों कुछ ऐसा करें कि आपकी यह सब जरूरत हासिल हो सकेंं।*

शुभ कामनाओं सहित....

रवीन्द्र भट्ट.

 

आखिर बड़ा सोचने में मुश्किल क्या आती है | What Problems are found in thinking big

*आखिर बड़ा सोचने में मुश्किल क्या आती है ?*

जब आप motivate होते हैं तो आप बड़ा सोचने लगते हैं , मेरी life grand होगी ,
मैं बहुत बड़ा मुकाम हांसिल करूँगा ….
पर जैसे ही थोडा वक़्त बीतता है आपका जोश ठंडा पड़ने लगता है …
अन्दर से आवाज़ आती है …
अरे इतना कहाँ हो पायेगा …
ये तो बहुत मुश्किल है …

आपके अन्दर की आवाज़ दरअसल सालों से छोटा सोचने की conditioning के कारण है …
आपको deliberately इसे बदलना होगा …
और ये तभी possible है जब आप इस आवाज़ के बावजूद बड़ा सोचते रहिये …
जो करना चाहते हैं उसे visualize करते रहिये …
उसे अपनी success diary में लिखते रहिये ….

जब आप ऐसा करेंगे तो एक दिन आपके अन्दर की आवाज़ भी बदल जाएगी और वो आपकी सोच की हाँ में हाँ मिलाने लगेगी और तब आप उसे हकीकत में बदलता देख पायंगे .

Friends, कुछ दिनों पहले मैं एक bakery shop के सामने से गुजर रहा था …
मैंने देखा कि वहाँ का guard फटे -चीथड़े कपड़ों में खड़े 8- 10 साल के तीन लड़कों को धुत्कार के भगा रहा था ……
क्यों है ऐसा ……
आज भी हमारे देश में कोई इतना गरीब क्यों है कि अपना पेट भी नहीं भर सकता …
क्यों नहीं सोचते हम सब बड़ा क्यों नहीं ख़तम करते अपनी mediocrity को और बदल डालते हैं अपनी और इस देश की तकदीर को ???

भला हम कैसे आँखें मूँद सकते हैं इन सबसे , हमारा luck था कि हम अच्छे घरों में पैदा हुए वर्ना उन तीन लड़कों में से एक मैं भी हो सकता था …
एक आप भी हो सकते थे …
क्यों ऐसा नहीं हो सकता कि कम से कम basic चीजों के लिए कोई इस बात पर निर्भर ना करे कि वो किस घर में पैदा हुआ है !

आप अच्छे हैं ये अच्छा है पर आप छोटा सोचते हैं ये बुरा है …
इसलिए अपनी सोच को बड़ा कीजिये …
हो सकता है आपको इसकी ज़रुरत न हो पर करोड़ों हैं जिन्हें इसकी ज़रुरत है …
ईश्वर ने आपको काबिल बनाया है तो उसके इस तोहफे को बेकार मत जाने दीजिये ….
उठिए ;
चलिए कुछ बड़ा कीजिये !!!

Nov 22, 2017

जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये | How to make way to succeed

*जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये!*

आपने movies में कोई ऐसा scene ज़रूर देखा होगा जिसमे hero jail से भागने के लिए एक सुरंग बनाता  है और finally उस जेल से फरार हो जाता है. काफी exciting होता है ये, नहीं!
पर आज मैं आपको खुद यही काम करने के लिए कह रहा हूँ …मैं आपको एक सुरंग बनाने के लिए कह रहा हूँ..
क्योकि आप भी अपनी life के hero हैं और unfortunately एक virtual jail में क़ैद हैं …
एक ऐसी जेल जिसमे जाने से पहले आपको पता भी नहीं था की वो एक जेल है…..
आप किसी ऐसी job, business या काम में फंस चुके हैं जो आपको बिलकुल पसंद नहीं है …
कभी कभी तो आप frustrated feel करते हैं …
क्योंकि आप यहाँ वो नहीं कर रहे होते जो आप सबसे अच्छे ढंग से कर सकते हैं…
आप खुद इसे छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन financial obligations की वजह से छोड़ नहीं पाते..

मत accept करिए इस condition को, अपनी सुरंग बनाना शुरू करिए …
अपने दिल का काम शुरू करिए...
अगर नहीं पता कि वो क्या है तो उसे तलाशिये ….
पर उस काम को ज़िन्दगी भर मत करिए जिसे आप पसंद नहीं करते ….
जो आपको mediocre बनाता है. इस बात को हमेशा याद रखिये कि –

*जिस चीज को आप चाहते हैं उसमे असफल होना जिस चीज को आप नहीं चाहते उसमे सफल होने से बेहतर है.*

*कैसे बनाएं सुरंग ?*

कैसे से ज्यादा ज़रूरी है की क्यों बनाएं …
*जेल में बहुत से कैदी होते हैं पर हीरो ही सुरंग क्यों बना पाता है, क्योंकि उसके सामने एक motive होता है, ये motive ही उसे इतना कठिन काम करने की inspiration देता है*…
*आपका motive क्या है ??*…
*क्या already आपके दिमाग में वो चीज है जो आप current job/ work को छोड़ कर करना चाहते हैं ? …*

अगर नहीं है तो इस बारे में सोचना बेकार है, ऐसे में अगर आप सुरंग बनाने में कामयाब हो भी जाते हैं तो पता है वो कहाँ निकलेगी ???

एक दूसरी जेल में!!

तो अगर आपको लगता है कि आप किसी जेल में बंद हैं तो सबसे पहले आपको जानना होगा कि यहाँ से निकल कर आप करना क्या चाहते हैं, what is that excites you, किस चीज को लेकर आप passionate हैं?

ये कैसे पता करें ?
जैसे मैं इसे वेस्टीज से कर रहा हूँ. वाकई यह बेमिसाल है,  मैं भी ऐसी जेल तोड़ने में कामयाब हो रहा हूँ, वाकई  हजारों  और लोगों ने भी वेस्टीज से ऐसी जेलें तोड़ चुके है। अगर आप भी ऐसी जेल तोड़ना चाहते हैं तो आप भी वेस्टीज से इसे संभव कर सकते हैं।

*Friends, most of us कभी न कभी किसी चीज को लेकर excited होते हैं …*
*सपने बुनने लगते हैं …*
*आपने लोगों को कहते सुना या खुद भी कहा होगा,*
“ *मैं एक restaurant शुरू करने वाला हूँ ”,*
“ *मैं एक xyz company डालने वाला हूँ …”,*etc..
*but most of the people just talk, they don’t act.*

*अगर आपको अपना passion जानना है तो ACT करना होगा, जो चीज बहुत appeal करे उसे कर डालिए …*
*don’t let the excitement die. कर के ही जाना जा सकता है की आप सचमुच उस काम के लिए बने हैं या नहीं.*

*अब लौट कर आते हैं अपने basic question पर, “कैसे बनाएं सुरंग ?”*

*हीरो क्या करता है ?*…
किसी औजार का प्रयोग करता है ….
आपको भी कुछ ‘औजारों’ की ज़रुरत पड़ेगी और वो औजार हैं..
आपकी skills,
आपका knowledge.
आप जो करना चाहते हैं उससे related knowledge और skills gather कीजिये.
उसके बाद औजार का प्रयोग करिए ….
सिर्फ औजार हाथ में आ जाये  और Hero उसे लेकर बैठा रहे तो क्या सुरंग बन पायेगी ?
नहीं.
*आपको भी अपने औजारों को प्रयोग में लाना होगा.*
*समय निकालना होगा.*

*हीरो सुरंग कब बनाता है*
*दिन में जब सब काम कर रहे होते हैं*…

नहीं, उस वक़्त तो वो भी काम करता है …
आप भी उस वक़्त वही करिए जो आप कर रहे हैं …
पर जिस वक़्त सब आराम कर रहे होते हैं …
सो रहे होते हैं …
मैच के मजे ले रहे होते हैं …facebook से चिपके हुए होते हैं…..
उस वक़्त आप अपनी सुरंग बनाइये …
अपना काम करिए …
ये आसान नहीं है …
इसमें time लगेगा …
1-2-3-4-5 साल या फिर और, सुरंग एक दिन में नहीं बनती.., …
बहुत कुछ sacrifice करना होगा ….
थक कर रुक जाने का दिल करेगा पर आपको चलते रहेना होगा….
और
*चलते -चलते एक दिन आ ही जायेगा जब आप जेल के बहार होंगे ….*
*अपनी नयी दुनिया में, आज़ाद, अपने नए काम के साथ… खुशियाँ बटोरते …खुशियाँ लुटाते*…

Sep 23, 2017

खरी बात- मजबूरी या समझदारी

खरी बात- मजबूरी या समझदारी

इंसान गुफाओं से निकलकर आज आधुनिक विकास का आनंद उठा रहा है । समय गुजरने के साथ साथ जरूरत़ें भी बढ़ जाती हैं ।ऐसा हर इंसान और परिवार के साथ हो रहा है । 

अपनी और परिवार की बढ़ती जरुरतों को पूरा करने की आपाधापी में इस एक बार मिलने वाले जीवन को कैसे आंनदपूर्वक जीया जाये?

हर कोई जीवन जी तो रहा है पर कुछ न कुछ छूटता रहता है ।

जिदंगी की गुजर बसर करने के लिये रूपये कमाना मजबूरी है ,ईच्छा नहीं ।

कोई अपनी जरूरत भर का भी नहीं कमा पा रहा है तो, कोई जरुरत से अधिक ।

किसी का स्वास्थ्य फिलहाल ठीक है तो, किसी का नहीं ।

 किसी के पास समय ही समय है तो, किसी के पास जीवन का आंनद लेने की फुर्सत ही नहीं है ।

 कोई मेहनत करने के बावजूद भी संघर्ष ही कर रहा है तो कोई बगैर किसी खास शिक्षा और कौशल के सफलताओं के झंडे गाड़ देता है । 

कोई मान सम्मान के लिये दूसरे की जान भी ले लेता है तो, कोई अपनी मान सम्मान की रक्षा के लिये अपनी जान भी दे देता है ।

कोई समाज सेवा के लिये अपना जीवन न्यौछावर कर देता है तो,कोई आपराधिक जीवन जीने का रास्ता अपना लेता है ।

कोई अपनी ईच्छा से काम कर रहा है तो, कोई मजबूरी में ।

कोई धर्म करम को ही जीवन मान लेता तो कोई भोग विलास को ही ।

हर इंसान के मन में कसक रहती ही रहती है , काश ऐसा हो जाता ,आदि आदि ।

इन सब बातों का निचोड़ यही हे कि जीवन कैसा होना चाहिये ,इस पर किसी की एक राय नहीं है ,न ही कोई ऐसी सही सलाह देता है ।

ऐसी सलाह देना और मिलना मुश्किल ही है क्योंकि ऐसी शिक्षा न तो स्कूल, कालेज में मिलती है न ही माँ बाप को पता है ।

वाकई यह असमंजस की स्थिति है और इस स्थिति में भ्रम का शिकार होना बड़ा आसान हो जाता है । आपको कोई भी किसी भी एक बात से प्रभावित कर सकता है ।

इतिहास और  वर्तमान में  लोगों के अनुभवों के आधार पर  और भविष्य के अनुमान के  आधार पर एक सुखी -समृध्द जीवन के मूल आधार हैं-

* धन-सम्पत्ति -Wealth

* स्वास्थ्य-Health

* समय -Time

* सुरक्षित भविष्य -Secured Future

* मान सम्मान - Recognition.

 जिस इंसान के पास ये सभी हैं, वाकई उसी का जीवन सुखी समृध्द जीवन है ।

इन सब में से किसी की कमी से जीवन में छटपहाट और संघर्ष ही रहेगा ।

आम तौर पर अधिकांश लोगों के जीवन में यह सब नहीं होता है ,इसीलिये उनका जीवन संघर्षों से भरा होता है । 

यह संघर्ष हो सकता है आमदनी के लिये हो या स्वास्थ्य का, या समय की कमी या समाज में मान सम्मान पाने का या भविष्य की चिंता ।

अधिकतर  लोगों की सोच यह बन चुकी है कि यह सब एक साथ मिलना असंभव है और जैसा जीवन चल रहा है , वैसे ही चलने दो । थोड़े बहुत लोग खूब रुपया पैंसा कमाकर धन संपत्ति जमा करके अपने आप को संतुष्ट कर लेते हैं कि चलो जीवन में अब मजा आयेगा। उनकी इस सोच के हिसाब से वे ठीक ही हैं क्योंकि अधिकांश चीजेँ रूपयों से आती हैं ।पर बाकी चीजें छूट जाती है।

सच्चाई तो यह कि हर इंसान इन सबको पा सकता है । बस इन बातों को समझना -सीखना पड़ता है और उनको पाने का रास्तें पर चलना पड़ता है ।

अगली बार एक एक बात पर विस्तार पूर्वक बात करूँगा ।

अगर आपको ये बातें ठीक लगती हैं या  अपने अनुभव साझा करना चाहते हैं तो कृपया कमेंट जरूर करें।

आपके सुखी- समृध्द जीवन की शुभकामनाओं सहित  आपका शुभाकाक्षीं-

रवींद्र भट्ट 

Aug 13, 2017

कैसी सोच और समझ के स्वामी हम?

एक बार मैनें कहीं पढ़ा था कि, बात-विचार और इंसानी समझ दो प्रकार की होती है ।
जैसे कोईभी बात या विचार या तो गलत होगा या सही, उसी प्रकार समझ भी सही या गलत होती है ।
गलत बात या विचार जल्दी और तेजी से समझ में आता है और फैलता भी तेजी से है ।और तो और बुरी बातों में बड़ी ताकत होती है अपनी ओर खींचने में।
सही बात जल्दी समझ में हर इंसान को नही आती और फैलती भी धीरे धीरे  है।
अगर किसी को सही बात जल्दी समझ में आ रही है तो यकीन मानिये, आप बुध्दिमान  तो हैं ही ,साथ ही आप पर ईश्वरीय कृपा भी है ।
ये बातें हकीकत में हम पर लागू होती हैं ,जैसे-
सबको पता है कि नशा करना आदि खराब है पर कितने हैं जो यह सब जानकर भी नशा करते हैं।
जो भी दुनिया में इंकलाब लाये हैं या बड़े कामयाब हैं, उन्होने सबसे पहले अपनी बुरी बातों और विचारों पर विजय हासिल की और तब सही विचारों की शक्ति से से बुलंदी को पा लेते हैं।
इन सब बातों से साबित होता है कि विचारों में बड़ी शक्ति होती है।
इतिहास इह बात का गवाह भी कि आजतक का सांसारिक, वैग्यानिक, आध्यात्मिक  विकास का मूल विचार ही हैं ।
विचार ही जन्मदाता हैं कर्म के और कर्म जन्मदाता हैं फल के, और फल का अधिकारी भी वही विचारों को रचने वाला ।
यह आप पर ही निर्भर करता है कि आप किस प्रकार का फल चाहते हैं ।
आपके जैसे विचार होंगे, फल भी वैसा ही होगा ।
विचारों में बड़ी गजब की शक्ति होती , हमें पता भी नही लगता और ये विचार अपना काम कर चुके होते हैं ।
जरा सोचिये या याद करिये वो वक्त जब किसी ने आपके साथ सबसे बुरा किया था!!!
देखो, आपके विचार बदल रहे हैं और आपकी शारीरिक भाव भंगिमा  और वाणी भी बदल रही है ।
अब जरा याद करिये उस बक्त को जब आपको सबसे अधिक खुशी मिली थी!!!!!
अब फिर आपके विचार बदलने लगे और उसका फल भी बदलने लगा ।
आप अपने विचारों के स्वामी हैं, यह बड़ी जिम्मेदारी भी है ।

सोचिये ध्यान से, विचार खेत हैं, बीज हैं ।
करम खाद -पानी, आप मालिक
इस खेत के करिये ,अपनी मनमानी ।

सोच -Thought Process

सोच -Thought Process-

हर व्यक्ति का जीवन अपने आस पास के माहौल से बहुत प्रभावित होता रहता है ।लेकिन एक  बात से उसके जीवन की दशा और दिशा तय होती है, वह है उसकी सोच । यानी उसकी सोच किस प्रकार की है ।
सोच किसी विरासत की मोहताज नही होती है ,लेकिन कुछ बातें हमारी सोच को पूरी तरह से बदल भी देती है ।
हम अपने जीवन को किस तरह जीना चाहते हैं यह हमारी सोच से निर्धारित होता है, सोच हमारी कर्मों को आकार देती है। कर्म ही फलदाता हैं।
सोचना एक स्वाभाविक प्रकृति है और किस प्रकार की सोच बनानी चाहिये, यह एक कला है ।
दुनिया में सभी महान व्यक्तियों की सफलता उनकी सोच का परिणाम है ।
यह एक सोच का परिणाम था कि एक राजकुमार ,राजपाट छोड़कर जीवन के रहस्य को समझने कठिन तपस्या करने चल पड़ा। उस महान आत्मा को दुनिया महात्मा बुद्ध के नाम से जानती है ।
एक बालक शिवलिंग को एक छोटे से चूहे से अपनी सुरक्षा न कर पाते देखकर , अपनी सोच को उस ऊँचाई पर ले जाता है ,जिसने अंधविश्वासों की दीवारों को गिराकर अपना नाम अमर कर दिया- महर्षि दयानंद सरस्वती के नाम से ।
ईश्वर को समझने की जिग्यासा को शांत करने की धुन मे एक बालक अपने गुरू स्वामी रामतीर्थ से भगवान को दिखाने की जिद, उस बालक की सोच इस तरह बदल जाती है कि वह बालक को दुनिया महान चिंतक , ग्यानवान स्वामी विवेकानंद के जानती है ।

ऐसे अनेक उदाहरण है , जहाँ सोचने के कारण उस व्यक्ति की जीवन ऊज्जवल बन कर अमर और करोडो़ लोगों के जीवन को दिशा और दशा देने में समर्थ बन गया 
सोच किसी की अमीरी, गरीबी, शिक्षा, अशिक्षा की मोहताज नहीं है ।
महर्षि बाल्मिकी, कालीदास , तुलसीदास, कबीर, अब्दुल कलाम आजाद आदि लोगों का जीवन परिचय किसी परिचय का मोहताज नहीं है ।

आप क्या और कैसे जीवन के स्वामी बनना चाहते हैं यह केवल आपकी सोच से निर्धारित होता है । 
अगर आपने अपने जीवन को सोच के खाँचे में फिट कर दिया है ,तो उसेआगे ले जाने का काम आपकी कल्पना के पंख , आपके ग्यान की सवारी करेगी ।

अगर अभी तक सोचा नहीं है तो यह बड़ी विकट स्थिति वैसी ही जैसे एक जहाज अपने समुद्र पत्तन से चल तो पड़ा है पर मंजिल का पता नहीं है ।

ऐसे में वह जहाज समुद्र में इधर उधर चक्कर ही लगाता रहेगा पर कभी भी मंजिल पता न होने से भटकता रहेगा ।
आज ज्यादातर लोगों का जीवन ऐसे ही है , कोई ठोस सोच, मंजिल , योजना न होने के कारण , एक सफल ,संपूर्ण समृध्द जीवन जी नहीं पाते है ।

शेष  अगली बार....
आपका शुभाकाक्षीं....

सोच - भाग्यविधाता जीवन की | Power of thinking

सोच - भाग्यविधाता  जीवन की.....


यह बह्रमांड ईश्वर की किसी न किसी सोच का ही परिणाम है । ईश्वर ने इस पृथ्वी में सोचने की यह ताकत केवल इंसान में ही दी है ।
हर इसांन का जीवन अपनी अपनी सोच का परिणाम है ।
मानव सभ्यता की विकास यात्रा इसका प्रमाण है ।यह इंसानी सोच से ही संभव हुआ है कि हम आधुनिक विकास से अपने जीवन स्तर को निरंतर ऊँचा कर पा रहे हैं।
हर इसांन की सोच देश, काल और परिस्थितियों से बदलती रहती है ।
सोच भी दो तरीके की होती है

एक स्थूल  सोच होती है ,जो हमारे मूड के हिसाब से बदलती रहती है ।जैसे- गुस्सा करना, आवेश में आकर नुकसान करना, सुखः दुःख महसूस करना , क्षणिक आवेश आदि
दूसरी सोच  सूक्ष्म सोच होती है। इससे ही जीवन को दिशा और दशा मिलती है। हम अपने जीवन में कैसे बनना चाहते हैं या बनते है?

सूक्ष्म सोच संस्कारों, परवरिश, पारिवारिक माहौल, शिक्षा, संगती,  दिमागी संतुलन और दिमागी खुराक से बनती है ।
दोनों सोचों का एक दूसरे पर गहरा असर पड़ता है।
सूक्ष्म सोच चिर स्थाई होती है और इसको बदलना आसान नही होता, किसी गंभीर घटना या दिल को चुभने जैसी बातों से इसमें बदलाव हो सकता है ।
हम जैसा सोचते हैं, हम वैसे ही बन जाते हैं।
यह सोच ही है जिसके कारण कोई व्यक्ति अपराधी बन जाता है तो कोई साधु या डाक्टर, तो कोई वैग्यानिक या दार्शनिक जैसे बन जाते हैं ।
आपकी सोच  जैसी है वैसे ही आपका दुनिया देखने का नजरिया बन जाता है ।
सोच चुम्बक जैसा काम करती है ।
जैसा आप सोचने लगते हैं,वैसे ही आपके काम होने लगते हैं, वैसीे ही आपको घटनायें घटित होते हुये दिखने लगती हैं, वैसे ही लोग भी आपको मिलने लगते हैं, वैसे ही परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं ।

अच्छे लोगों को अच्छे लोग मिलने लगते हैं, तो खराब आदतों और मानसिकता वालों को वैसे ही लोग मिल जाते हैं ।
आप जैसा बनना चाहते हैं वैसी ही सोच बनाइये, जीत आपकी सोच की ही होगी ।
जो लोग जैसे हैं , उनकी सोच वैसी ही है ।
अपराधी की सोच अपराध करने वाली होती है तो साधु की सोच परोपकार करने की ।
यह सोच बदलने का कमाल ही था कि एक डाकू ,एक ऋषि बन गये,जिनको हम वाल्मिकी ऋषि के नाम से जानते हैं ।
महात्मा गाँधी जी को एक अंग्रेज द्धारा रेलवे स्टेशन पर फैंक देने के कारण बदली सोच का परिणाम था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा ।

यही बात हमारे ऊपर भी लागू होती है कि हम क्या बनना चाहते थे या बनना चाहते हैं।
क्या हमारी सोच भी वैसी ही थी या है , जो हम बनना चाहते थे या चाहते हैं ।
अगर नहीं तो अपनी सोच बदलिये और बनिये अपनी ईच्छानुसार ।
इस दुनिया में सबसे ज्यादा मुश्किल काम अपनी सोच बदलना है ।सोच को बदलना और उसे वहीं टिकाये रखना एक कला है जिसे सीखा जा सकता है और कुछ समय तक निरंतर समय देना होता है ।

शेष अगले अंक में ...

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