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Mar 8, 2018

सही दिशा में आगे बढ़ना क्यो जरूरी है | Why to move forward in life is so important?


सफल जीवन का मंत्र नंबर 2

"सही दिशा में ही आगे बढ़े"

*दोस्तों हम सभी अपने कार्य क्षेत्र में और जीवन मे सफल होना चाहते हैं, इस बारें में मैने एक लेख - "क्या आपने अपने लक्ष्य बनाये हैं?" पोस्ट किया था, आज उसके आगे की बात करता हूँ।*

*जीवन में आगे बढ़ने के लिये जितना जरूरी लक्ष्य निर्धारित करना है ,उससे अधिक जरूरी बात है सही दिशा में चलना।*

👉🏻जब आप सुबह घर से निकलते हैं तो आपको पता होता है कि आपको कहाँ जाना है और आप वहां पहुँचते हैं ,
*सोचिये अगर आपको यह नहीं पता हो कि आप को कहाँ जाना है तो भला आप क्या करेंगे?*
*इधर उधर भटकने में ही समय व्यर्थ हो जायेगा.*

*इसी तरह इस जीवन में भी यदि आपने अपने लिए लक्ष्य नहीं बनाये हैं तो आपकी* *ज़िन्दगी तो चलती रहेगी पर जब आप बाद में पीछे मुड़ कर देखेंगे* *तो शायद आपको* *पछतावा हो कि आपने कुछ खास achieve  नहीं किया!*!

*लक्ष्य व्यक्ति को एक सही दिशा देता है. उसे बताता है कि कौन सा काम उसके लिए जरूरी है और कौन सा नहीं.  यदि goals clear हों तो हम उसके मुताबिक अपने आप को तैयार करते हैं.*

*👉🏻हमारा subconscious mind हमें उसी के अनुसार act करने के लिए प्रेरित करता है.*
*दिमाग में लक्ष्य साफ़ हो तो उसे पाने के रास्ते भी साफ़ नज़र आने लगते हैं और इंसान उसी दिशा में अपने कदम बढा देता है.*

अतः यह बहुत ही जरूरी है कि आप अपने लक्ष्य निर्धारित करने के बाद उन लक्ष्यों को पाने के एकदम सही रास्ते पर चले, नहीं तो असफल होने के अलावा हमारे हाथों से सबसे बेशकीमती समय भी निकल जायेगा ,जो आप  कभी वापस खरीद भी नहीं सकते है...
आपकी सर्वांगीण सफलता की शुभकामनाओं के साथ आपका शुभाकांक्षी...
रवीन्द्र भट्ट

Mar 6, 2018

आपने अपने कैसे लक्ष्य बनाए हैं?| What kind of goals should we make?

यदि  आपसे पूछा जाये कि क्या आपने अपने लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित कर रखे हैं तो आपके सिर्फ दो ही जवाब हो सकते हैं: हाँ या ना .

*अगर जवाब हाँ है तो ये बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि ज्यादातर लोग तो बिना किसी निश्चित लक्ष्य के ही ज़िन्दगी बिताये जा रहे हैं और आप उनसे कहीं बेहतर स्थिति में हैं*

पर यदि जवाब ना है तो ये थोड़ी चिंता का विषय है.
थोड़ी इसलिए क्योंकि भले ही अभी आपका कोई लक्ष्य ना हो पर जल्द ही सोच-विचार कर के अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं.
*लक्ष्य या Goals  होते क्या हैं?*
*लक्ष्य एक ऐसा कार्य है जिसे हम सिद्ध करने की मंशा रखते हैं* *Goal is a task which we intend to accomplish*.
कुछ examples लेते हैं:
एक  student का लक्ष्य हो सकता है: ” Final Exams  में 80% से ज्यादा marks लाना.”

एक employee लक्ष्य हो सकता है अपनी performance  के basis पे promotion पाने का.

एक house-wife का लक्ष्य हो सकता है :” Home based business कि शुरुआत करना.

एक blogger का लक्ष्य हो सकता है:” अपने ब्लॉग कि page rank शुन्य से तीन तक ले जाना” .
एक समाजसेवी का लक्ष्य हो सकता है:” किसी गाँव के सभी लोगों को साक्षर बनाना” 

इस प्रकार के लक्ष्य केवल एक पक्षीय हैं ,एक पक्षीय का मतलब है कि ये लक्ष्य अपने रोल के अनुसार तय किये जा रहे हैं-एक स्टुडेंट के रूप में, इंप्लोई के रूप में, गृहिणी के रुप में आदि आदि।
पर यहां पर मेरा असली मतलब लक्ष्य किसी रोल के अनुसार निर्धारित करना नहीं है। क्योंकि रोल के अनुसार लक्ष्य अगर आप बनाकर हासिल भी कर सकते हैं पर बहुत सारे बहुत महत्वपूर्ण जीवन के लक्ष्य जो आपको एक बेहतरीन इंसान के रूप में बनायेंगे, वो छूट जायेंगे ।एक बेहतरीन और सफल इंसान बनने का लक्ष्य ही आपके सभी लक्ष्यों का अंतिम लक्ष्य होता है ।
"एक सधे तो सब सधे"
यह लक्ष्य आपके सभी लक्ष्यों को पूरा कर देता है।
*तो आप क्या चाहेंगे? आधी अधूरी सफलता या सर्वांगीण सफलता?*
जीवन एक ही बार मिलता है , इस जीवन में लक्ष्य भी इसी प्रकार के बनाये जाने चाहिए। दुनिया में बहुत लोग अपने रोल के हिसाब से बहुत सफल हुये हैं पर वे अपने जीवन लक्ष्यों को न बना पाने के कारण बाकी चीजों में फेल हुये और भरपूर तरीके से जी नहीं पाये...
केवल एक दो मामलों मे सफलता पाने मात्र से जीवन सफल  तो नहीं माना जा सकता है।
कोई व्यक्ति अनुचित तरीकों से बहुत धन संपत्ति जमाकर लेता है या कोई बिजनेस से धनवान बन जाता है पर स्वास्थ्य का नाश कर लेता है तो ऐसी सफलता क्या सही है।
जीवन में सही और सर्वांगीण विकास के लक्ष्य कुछ ऐसे हो सकते हैं-

*आर्थिक आजादी.*

*समय की आजादी*

*अच्छा स्वास्थ्य*

*बहुत अच्छा बैंक बैलेंस या निवेश*

*सपनों का घर.*

*सपनों की गाड़ी*

*देश- विदेश पर्यटन .*

*मान सम्मान  पाना*

*बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दिलाना*

*अपनी हौबी को पूरा करना या अपने बच्चों की हाबी को पूरा करना.*

*समाज सेवा व परोपकार  कार्य करना*

*अपनी इच्छानुसार कोई और नेक काम करना..*

ऐसे की कम या ज्यादा लक्ष्य बनाकर हासिल करना ही एक सफल जीवन माना जा सकता है.
आपका शुभाकांक्षी...
रवीन्द्र भट्ट

Feb 15, 2018

सोच बदलेगी, किस्मत बदल जाएगी | Think and Succeed


*सोच बदलेगी, किस्मत बदल जाएगी*
*सोच बदलेगी, नजर बदल जाएगी*
*नज़र बदलेगी, नेमत बदल जाएगी*
*आसमां पाना हो, तो परवाज़ मत बदलना*
*परवाज़ बदलोगे, तो हवाएं बदल जाएँगी*

हमारी प्रजाति मनुष्य की है। यह सोच का कीटाणु केवल हम मनुष्यों में विद्यमान है।
*यह कीटाणु कभी सकारात्मक होता है कभी बहुत ही विध्वंसक होता है। इस पर किसी का ज़ोर नहीं होता, परन्तु इसके आधार पर यह सीखा जा सकता है कि मनुष्य अपनी सोच को यदि बुद्धिमानी से नियंत्रित करे तो वह एक सफल जीवन यापन कर सकता है और जीवन में सफलताओं और असफलताओं से ऊपर उठ सकता है।*
सच्चाई यही है कि हर व्यक्ति के जीवन में सोच की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यह शक्ति इसे जानवरों से मुख़्तलिफ़ करती है।
*सोच का मनुष्य के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव रहता है। यही कारण है कि इंसान के विचारों को कैसा होना चाहिए, उसे कैसे व्यवस्थित करना चाहिए और उसके मन पर विशेष विचार का प्रभाव कैसे पड़ता है?*

यह मनुष्य स्वयं ही निर्धारित करे तो बेहतर है नहीं तो उसमें और कुत्ते की पूँछ में क्या फ़र्क रह जायेगा।

मैंने सुना था
*"ज़िन्दगी में हम जो भी कार्य करते हैं या जैसा भी बनते हैं उसके पीछे हमारा स्वाभाव, हमारे संस्कार तथा हमारी संगत आर्थात हमारे यार-दोस्त या रिश्ते-नातेदार जिनकी सोहबत में हम रोज़मर्रा की ज़िन्दगी बिताते हैं, का गहरा प्रभाव होता है"*
*👉🏻लेकिन जिस दिन आप अपनी सोच से अपने जीवन के फैसले खुद लेने लग जाते हैं उस क्षण के पश्चात् से यह प्रभाव, यह स्वाभाव, यह संस्कार और उस सांगत का कोई भी असर आपके ऊपर नहीं रहता। आपकी सोच अपने में इतनी सशक्त हो जाती है जो ना आपको बहकने देती है, ना बदलने, और ना अपने लक्ष्य से डिगने देती है।*

आपका शुभाकांक्षी...
रवीन्द्र भट्ट

Dec 26, 2017

दुनिया में सबसे मुश्किल काम है सही दिशा में सही सोचना| How to think in right direction .

दोस्तों हम सभी अपने या अपने परिवार के लिये कुछ तो कर ही रहें हैं, भले ही तरीके अलग अलग होंगे, रिजल्ट भी सबके लिये अलग अलग ही होगा। किसी को कम , किसी को ज्यादा मिल रहा होगा।

मेहनत सभी कर रहें हैं पर लाख टके का सवाल यह है कि-
*क्या हमें हमारी मेहनत का सही रिजल्ट या पुरस्कार मिल रहा है?*

*क्या हमारी सभी जरूरत पूरी हो रही हैं?*
*क्या हमें इससे अधिक नहीं मिलना चाहिए?*
*क्या और बेहतर पाने की हमारी इच्छा नहीं हैं?*
*क्या जो हम कर रहे हैं ,उससे हमारी अंर्तआत्मा को दुःख नही पहुंच रहा हैं, हम अपनी खुद्दारी से समझौता तो नहीं कर रहें हैं?*
*क्या हमें अपने मौजूदा काम में प्रसन्नता मिल रही है या हम इस काम को तब भी करते रहेंगे अगर उस काम से हमें कोई फायदा ( जैसै इनकम ,मगर मजबूरी नहीं )नहीं मिल रहा है ?*

*दुनिया में सबसे मुश्किल काम है सही दिशा में सही सोचना*🤔 क्योंकि सही सोचने में दिमाग लगता है , जब सही बातें सोचने लगते हैं तो सच्चाई निकल आती है। इससे टेंशन होनी लगती है क्योंकि सही सोच हमें स
काम  करने के लिये उकसाती है जिससे मनचाही सफलता मिलेगी।काम तो ऐसे ,जो आज तक नहीं किये हैं ,इसलिये ज्यादातर लोग सोचना ही नहीं चाहते।
*अब कोई सोचेगा ही नहीं तो मनचाहा तो मिलने से रहा। फिर एक ही रास्ता बचता है - जो मिल रहा है उसी में संतोष करो और ऐसे लोगों ने ही एक कहावत को जन्म दिया- उतने ही पैर फैलावो, जितनी चादर है।*
*जबकि सही सोच वाला इतनी बड़ी चादर का इंतजाम करेगा कि उसमे पूरा समा सके, हो सके तो एक आध और भी समा सकें*

*मेरा मानना है कि जब कुछ करना है ही तो कुछ ऐसा और इतना कर लो कि सब बात बन जाय 😊जैसे-*

*अगर भौतिक सुख सुविधाएं* *जुटाने की ही बात है तो एक छोटे से घर की जगह एक बड़े से बंगले के बारे में सोचिये , या एक बड़ा सा अपार्टमेंट बनाने के* *ख्वाब देखिये , एक छोटी सी गाड़ी में घूमने की जगह* *luxury cars की fleet खड़ी करने के बारे में सोचिये*
*कुछ लाख का बैंक बैलेंस की जगह करोडो़ रूपये महीना या सालाना पैसीव इनकम का स्रोत बनाने की सोचिये।*

*छोटे मोटे घूमने फिरने की जगह अपने देश विदेश में सभी देखने, घूमने लायक जगहों पर जाने के बारें में सोचिये और सभंव करने के उपाय सोचिये*

*छोटी मोटी समाज सेवा के बदले बहुत से जरूरतमंदों को साधन संपन बनाने की सोचिये*

*आम भारतीय पूरी जिदंगी में आर्थिक और स्वास्थ्य की समस्या से हैरान परेशान है जिसका कारण  हैल्थ और फायनेन्शियल एजुकेशन नहीं होना है, लाखों करोड़ों लोगों को ऐसी सही और जरूरी एजुकेशन देने की सोचिये*
*हम अपनी सही गलत बात को प्रूव (साबित करना)करने में समय और ऊर्जा नष्ट कर रहें है जिसका कोई फायदा नहीं है, इसकी जगह खुद को इंप्रूवमेंट(सुधार करना) करने में लगायें*
*अच्छी बातोँ को बताने वाले या मदद करने वालों को तवज्जो न देनें या खिल्ली उड़ाने की बजाय उन बातों और उन भले लोगों को सम्मान देने और उनकी बातों को बढा़वा देने की सोचें।*
*अपने बच्चों को भी अपने जैसा  करने या बनने  की सलाह देने की बजाय उनके लिये कुछ करें कि वे अपनी हौबी को डेवलेप कर सकें और प्रचलित नौकरी या बिजनेस की जगह अपनी हौबी को ही आगे बढा़यें*

*फालतू की गप्पें हाँकने या टीवी देखने में , राजनीतिक तर्क कुतर्क में समय नष्ट करने के बजाय किसी विचार को मूर्तरुप देनी की सोचे*
*एक दूसरे से कंपीटीशन करने बजाय साथ मिलकर आगे बढ़ने की सोचें*

*common man की तरह सोचेंगे तो common man की तरह ही ज़िन्दगी बिता देंगे*…
जिदंगी आपकी...
सोच भी आपकी....
आप कैसे बनना चाहते हैं...
यह च्वॉइस भी आपकी..

*मैने कामन मैन की तरह सोचना कभी का बंद कर दिया ,जिसका परिणाम आप मेरी सोच को विभिन्न पोस्ट के रूपों मे आपको दिखाई दे रही होंगी. साथ ही कुछ ऐसा ही कर रहा हूँ जो 100% मनचाही सफलता  पाने की गाँरटी है.....*
😊
अस्तु ....
आपका शुभाकाक्षी...
रवींद्र 😊🙏🏻

Dec 4, 2017

आखिर बड़ा सोचने में मुश्किल क्या आती है | What Problems are found in thinking big

*आखिर बड़ा सोचने में मुश्किल क्या आती है ?*

जब आप motivate होते हैं तो आप बड़ा सोचने लगते हैं , मेरी life grand होगी ,
मैं बहुत बड़ा मुकाम हांसिल करूँगा ….
पर जैसे ही थोडा वक़्त बीतता है आपका जोश ठंडा पड़ने लगता है …
अन्दर से आवाज़ आती है …
अरे इतना कहाँ हो पायेगा …
ये तो बहुत मुश्किल है …

आपके अन्दर की आवाज़ दरअसल सालों से छोटा सोचने की conditioning के कारण है …
आपको deliberately इसे बदलना होगा …
और ये तभी possible है जब आप इस आवाज़ के बावजूद बड़ा सोचते रहिये …
जो करना चाहते हैं उसे visualize करते रहिये …
उसे अपनी success diary में लिखते रहिये ….

जब आप ऐसा करेंगे तो एक दिन आपके अन्दर की आवाज़ भी बदल जाएगी और वो आपकी सोच की हाँ में हाँ मिलाने लगेगी और तब आप उसे हकीकत में बदलता देख पायंगे .

Friends, कुछ दिनों पहले मैं एक bakery shop के सामने से गुजर रहा था …
मैंने देखा कि वहाँ का guard फटे -चीथड़े कपड़ों में खड़े 8- 10 साल के तीन लड़कों को धुत्कार के भगा रहा था ……
क्यों है ऐसा ……
आज भी हमारे देश में कोई इतना गरीब क्यों है कि अपना पेट भी नहीं भर सकता …
क्यों नहीं सोचते हम सब बड़ा क्यों नहीं ख़तम करते अपनी mediocrity को और बदल डालते हैं अपनी और इस देश की तकदीर को ???

भला हम कैसे आँखें मूँद सकते हैं इन सबसे , हमारा luck था कि हम अच्छे घरों में पैदा हुए वर्ना उन तीन लड़कों में से एक मैं भी हो सकता था …
एक आप भी हो सकते थे …
क्यों ऐसा नहीं हो सकता कि कम से कम basic चीजों के लिए कोई इस बात पर निर्भर ना करे कि वो किस घर में पैदा हुआ है !

आप अच्छे हैं ये अच्छा है पर आप छोटा सोचते हैं ये बुरा है …
इसलिए अपनी सोच को बड़ा कीजिये …
हो सकता है आपको इसकी ज़रुरत न हो पर करोड़ों हैं जिन्हें इसकी ज़रुरत है …
ईश्वर ने आपको काबिल बनाया है तो उसके इस तोहफे को बेकार मत जाने दीजिये ….
उठिए ;
चलिए कुछ बड़ा कीजिये !!!

Nov 22, 2017

जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये | How to make way to succeed

*जेल से निकलना है तो सुरंग बनाइये!*

आपने movies में कोई ऐसा scene ज़रूर देखा होगा जिसमे hero jail से भागने के लिए एक सुरंग बनाता  है और finally उस जेल से फरार हो जाता है. काफी exciting होता है ये, नहीं!
पर आज मैं आपको खुद यही काम करने के लिए कह रहा हूँ …मैं आपको एक सुरंग बनाने के लिए कह रहा हूँ..
क्योकि आप भी अपनी life के hero हैं और unfortunately एक virtual jail में क़ैद हैं …
एक ऐसी जेल जिसमे जाने से पहले आपको पता भी नहीं था की वो एक जेल है…..
आप किसी ऐसी job, business या काम में फंस चुके हैं जो आपको बिलकुल पसंद नहीं है …
कभी कभी तो आप frustrated feel करते हैं …
क्योंकि आप यहाँ वो नहीं कर रहे होते जो आप सबसे अच्छे ढंग से कर सकते हैं…
आप खुद इसे छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन financial obligations की वजह से छोड़ नहीं पाते..

मत accept करिए इस condition को, अपनी सुरंग बनाना शुरू करिए …
अपने दिल का काम शुरू करिए...
अगर नहीं पता कि वो क्या है तो उसे तलाशिये ….
पर उस काम को ज़िन्दगी भर मत करिए जिसे आप पसंद नहीं करते ….
जो आपको mediocre बनाता है. इस बात को हमेशा याद रखिये कि –

*जिस चीज को आप चाहते हैं उसमे असफल होना जिस चीज को आप नहीं चाहते उसमे सफल होने से बेहतर है.*

*कैसे बनाएं सुरंग ?*

कैसे से ज्यादा ज़रूरी है की क्यों बनाएं …
*जेल में बहुत से कैदी होते हैं पर हीरो ही सुरंग क्यों बना पाता है, क्योंकि उसके सामने एक motive होता है, ये motive ही उसे इतना कठिन काम करने की inspiration देता है*…
*आपका motive क्या है ??*…
*क्या already आपके दिमाग में वो चीज है जो आप current job/ work को छोड़ कर करना चाहते हैं ? …*

अगर नहीं है तो इस बारे में सोचना बेकार है, ऐसे में अगर आप सुरंग बनाने में कामयाब हो भी जाते हैं तो पता है वो कहाँ निकलेगी ???

एक दूसरी जेल में!!

तो अगर आपको लगता है कि आप किसी जेल में बंद हैं तो सबसे पहले आपको जानना होगा कि यहाँ से निकल कर आप करना क्या चाहते हैं, what is that excites you, किस चीज को लेकर आप passionate हैं?

ये कैसे पता करें ?
जैसे मैं इसे वेस्टीज से कर रहा हूँ. वाकई यह बेमिसाल है,  मैं भी ऐसी जेल तोड़ने में कामयाब हो रहा हूँ, वाकई  हजारों  और लोगों ने भी वेस्टीज से ऐसी जेलें तोड़ चुके है। अगर आप भी ऐसी जेल तोड़ना चाहते हैं तो आप भी वेस्टीज से इसे संभव कर सकते हैं।

*Friends, most of us कभी न कभी किसी चीज को लेकर excited होते हैं …*
*सपने बुनने लगते हैं …*
*आपने लोगों को कहते सुना या खुद भी कहा होगा,*
“ *मैं एक restaurant शुरू करने वाला हूँ ”,*
“ *मैं एक xyz company डालने वाला हूँ …”,*etc..
*but most of the people just talk, they don’t act.*

*अगर आपको अपना passion जानना है तो ACT करना होगा, जो चीज बहुत appeal करे उसे कर डालिए …*
*don’t let the excitement die. कर के ही जाना जा सकता है की आप सचमुच उस काम के लिए बने हैं या नहीं.*

*अब लौट कर आते हैं अपने basic question पर, “कैसे बनाएं सुरंग ?”*

*हीरो क्या करता है ?*…
किसी औजार का प्रयोग करता है ….
आपको भी कुछ ‘औजारों’ की ज़रुरत पड़ेगी और वो औजार हैं..
आपकी skills,
आपका knowledge.
आप जो करना चाहते हैं उससे related knowledge और skills gather कीजिये.
उसके बाद औजार का प्रयोग करिए ….
सिर्फ औजार हाथ में आ जाये  और Hero उसे लेकर बैठा रहे तो क्या सुरंग बन पायेगी ?
नहीं.
*आपको भी अपने औजारों को प्रयोग में लाना होगा.*
*समय निकालना होगा.*

*हीरो सुरंग कब बनाता है*
*दिन में जब सब काम कर रहे होते हैं*…

नहीं, उस वक़्त तो वो भी काम करता है …
आप भी उस वक़्त वही करिए जो आप कर रहे हैं …
पर जिस वक़्त सब आराम कर रहे होते हैं …
सो रहे होते हैं …
मैच के मजे ले रहे होते हैं …facebook से चिपके हुए होते हैं…..
उस वक़्त आप अपनी सुरंग बनाइये …
अपना काम करिए …
ये आसान नहीं है …
इसमें time लगेगा …
1-2-3-4-5 साल या फिर और, सुरंग एक दिन में नहीं बनती.., …
बहुत कुछ sacrifice करना होगा ….
थक कर रुक जाने का दिल करेगा पर आपको चलते रहेना होगा….
और
*चलते -चलते एक दिन आ ही जायेगा जब आप जेल के बहार होंगे ….*
*अपनी नयी दुनिया में, आज़ाद, अपने नए काम के साथ… खुशियाँ बटोरते …खुशियाँ लुटाते*…

Aug 13, 2017

सोच - भाग्यविधाता जीवन की | Power of thinking

सोच - भाग्यविधाता  जीवन की.....


यह बह्रमांड ईश्वर की किसी न किसी सोच का ही परिणाम है । ईश्वर ने इस पृथ्वी में सोचने की यह ताकत केवल इंसान में ही दी है ।
हर इसांन का जीवन अपनी अपनी सोच का परिणाम है ।
मानव सभ्यता की विकास यात्रा इसका प्रमाण है ।यह इंसानी सोच से ही संभव हुआ है कि हम आधुनिक विकास से अपने जीवन स्तर को निरंतर ऊँचा कर पा रहे हैं।
हर इसांन की सोच देश, काल और परिस्थितियों से बदलती रहती है ।
सोच भी दो तरीके की होती है

एक स्थूल  सोच होती है ,जो हमारे मूड के हिसाब से बदलती रहती है ।जैसे- गुस्सा करना, आवेश में आकर नुकसान करना, सुखः दुःख महसूस करना , क्षणिक आवेश आदि
दूसरी सोच  सूक्ष्म सोच होती है। इससे ही जीवन को दिशा और दशा मिलती है। हम अपने जीवन में कैसे बनना चाहते हैं या बनते है?

सूक्ष्म सोच संस्कारों, परवरिश, पारिवारिक माहौल, शिक्षा, संगती,  दिमागी संतुलन और दिमागी खुराक से बनती है ।
दोनों सोचों का एक दूसरे पर गहरा असर पड़ता है।
सूक्ष्म सोच चिर स्थाई होती है और इसको बदलना आसान नही होता, किसी गंभीर घटना या दिल को चुभने जैसी बातों से इसमें बदलाव हो सकता है ।
हम जैसा सोचते हैं, हम वैसे ही बन जाते हैं।
यह सोच ही है जिसके कारण कोई व्यक्ति अपराधी बन जाता है तो कोई साधु या डाक्टर, तो कोई वैग्यानिक या दार्शनिक जैसे बन जाते हैं ।
आपकी सोच  जैसी है वैसे ही आपका दुनिया देखने का नजरिया बन जाता है ।
सोच चुम्बक जैसा काम करती है ।
जैसा आप सोचने लगते हैं,वैसे ही आपके काम होने लगते हैं, वैसीे ही आपको घटनायें घटित होते हुये दिखने लगती हैं, वैसे ही लोग भी आपको मिलने लगते हैं, वैसे ही परिणाम मिलने शुरू हो जाते हैं ।

अच्छे लोगों को अच्छे लोग मिलने लगते हैं, तो खराब आदतों और मानसिकता वालों को वैसे ही लोग मिल जाते हैं ।
आप जैसा बनना चाहते हैं वैसी ही सोच बनाइये, जीत आपकी सोच की ही होगी ।
जो लोग जैसे हैं , उनकी सोच वैसी ही है ।
अपराधी की सोच अपराध करने वाली होती है तो साधु की सोच परोपकार करने की ।
यह सोच बदलने का कमाल ही था कि एक डाकू ,एक ऋषि बन गये,जिनको हम वाल्मिकी ऋषि के नाम से जानते हैं ।
महात्मा गाँधी जी को एक अंग्रेज द्धारा रेलवे स्टेशन पर फैंक देने के कारण बदली सोच का परिणाम था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा ।

यही बात हमारे ऊपर भी लागू होती है कि हम क्या बनना चाहते थे या बनना चाहते हैं।
क्या हमारी सोच भी वैसी ही थी या है , जो हम बनना चाहते थे या चाहते हैं ।
अगर नहीं तो अपनी सोच बदलिये और बनिये अपनी ईच्छानुसार ।
इस दुनिया में सबसे ज्यादा मुश्किल काम अपनी सोच बदलना है ।सोच को बदलना और उसे वहीं टिकाये रखना एक कला है जिसे सीखा जा सकता है और कुछ समय तक निरंतर समय देना होता है ।

शेष अगले अंक में ...

आपका शुभाकांक्षी...

सही शुरुआत कैसे करें । How to start in Right Manner

“एक नयी शुरुआत” – जरूर पढ़ें यह लेख आपकी जिंदगी बदल सकता हैं (Rules of Success) जीवन (Life) में हमारे पास अपने लिए मात्र 3500 दिन (9 वर्ष व 6...