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Dec 26, 2017

कैसे बढाएं अपनी dream life की तरफ अपने कदम ?


कल मैनें हर दिल की बात ड्रीम लाइफ के बारें में बात करी थी कि क्या ड्रीम लाइफ के बारें हमनें कभी सोचा है? या ड्रीम लाइफ कैसी होनी चाहिये?
जो लोग अपने जीवन में कुछ मीनिंग फुल करना चाहते हैं उनके लिये यह पोस्ट बहुत महत्वपूर्ण है, आशा.है आप इससे फायदा लेंगे...
आज मैं आपके लिये इस विषय को एक कदम और आगे ले जा रहा हूँ

*कैसे बढाएं अपनी dream life की तरफ अपने कदम ?*

For example:

*यदि आप एक सादा जीवन जीने में यकीन करते हैं तो आपके आदर्श जीवन में लम्बी लम्बी गाड़ियों और बड़े बड़े बंगलों की महत्ता नहीं है, पर सिर्फ इसलिए कि society इन्ही चीजों से impress होती है, आप इसे अपनी ideal life में include करें ये सही नहीं होगा. आपको सिर्फ खुद को impress करना है और किसी को नहीं.*

*आपको इन प्रश्नों के उत्तर विस्तार से सोचने होंगे. और यदि आप इस सोच को हकीकत बनते देखना चाहते हैं तो आपको इनमे डूबना होगा. आप चाहें तो इनसे सम्बंधित कोई sketch या  painting भी बना सकते हैं. या अपने दिमाग में एक छोटी सी movie बना सकते हैं ,जिसे आप बार बार अपने  mind में  play कर के देख सकते हैं. मैं अपनी ideal life के बारे में अक्सर अपनी diary में लिखता हूँ. और लगभग हर रोज उस बारे में सोचता हूँ. ऐसा करते वक्त मेरे आँखों के सामने कुछ दृश्य गुजरते हैं , जो मुझे खुशी का एहसास कराते हैं.*

*जहाँ तक ज़िन्दगी कहाँ और किन लोगों के साथ बीताने का प्रश्न है इनके उत्तर तो आप आसानी से सोच सकते हैं पर Ideal life  के बारे में plan करते हुए जो सबसे बड़ा challenge आपके  सामने  आ  सकता  है  वो  है  रोज़ी  रोटी  का  सवाल*.
*शायद  आपका  काम आपको वहां  नहीं  जाने  देता  जहाँ  आप  रहना  चाहते  हैं ?*
*इसीलिए  एक  ideal life के  बारे  में  सोचने  में  सबसे  ज़रूरी  है  कि  आप  अपने  काम  के  बारे  में  गंभीरता  से  सोचें*.

*यहाँ मैं काम से सम्बंधित दो rules आपके साथ share करना  चाहता  हूँ, जो आपके लिए helpful हो सकते हैं*  :

*रूल नंबर 1-10,000 Hour Rule:*

*जाने  माने  author Malcolm Gladwell , कि  theory के  मुताबिक  आप  जो  कुछ  भी  करते  हैं  उसमे  महारथ  हासिल  करने  के  लिए  आपको  कम  से  कम  उस  काम  को  10,000 घंटे  करना होता है तभी  आप  उसमे  expert बन सकते हैं. इसका मतलब है  कि  यदि आप  रोज़  5 घंटे  किसी  काम  को  करेंगे तो  भी  Expert बनने  में  आपको 5-6 साल लग जायेंगे . इसलिए  patience रखिये , इसमें  time लगेगा.*

*रूल नंबर 2-Expert बनें ?*

*ताकि  आप  अपनी  terms and conditions पे  काम  कर  सकें . आप  चाहे  जिस field में  हैं  उसमे  best बनिए . यदि  आप  कोई  subject पढ़ाते  हैं  तो  उसमे  इतना  रम  जाइए  कि  आपकी  जैसी  जानकारी   वाला दूसरा कोई  दूर  दूर  तक  ना  हो . यदि  आप accounts का काम  करते  हैं  तो उसमे महारथ हासिल कर लीजिये ताकि लोग आपको एक consultant के रूप में देखें. Experts की respect होती है , उनका  नाम  होता  है  और  उन्हे  कभी  काम  की  कमी  नहीं  रहती …..चाहे  वो  जहाँ  रहे.*

इसका  एक  example आप  अपने  High School- Inter days में  देख  सकते  हैं , ऐसे  कई  teachers होते  हैं  जो  किसी  school में  नहीं  पढ़ाते  पर  उनके  यहाँ  tuition पढने  वालों  की  line लगी  रहती  है …क्योंकि वो  अपने  subject में  expert होते  हैं . और  वो  ये  रुतबा  अपने  हज़ारों  घंटो  की  मेहनत  के  बाद  ही  हासिल  कर  पाते  हैं.

यदि आप currently जो काम करते हैं वो आपके मन का नहीं है तो आप रोज़ अपने मन के काम के लिए कुछ समय निकालिए और धीरे धीरे उसमे expert बनने का प्रयास कीजिये, 
*George Burns की ये बात याद रखिये ,”जिस चीज  को आप चाहते हैं उसमे असफल होना जिस चीज को आप नहीं चाहते उसमे सफल होने से बेहतर है.” इसलिए लगे रहिये देर से ही सही एक दिन आप ज़रूर सफल होंगे.*

*और जब  आप एक  expert बन  जायेंगे  तो  शायद  आप  अपने  dream place या  उसके  आस -पास  जा  कर  भी  अपना  काम  कर सकें . Globalization के  इस  दौर  में ऐसा  पहले  से  कहीं  अधिक  संभव  है . और  Internet के  माध्यम  से  भी  बहुत  से  लोग  अपने मन  का  काम  घर  बैठे  कर पा रहे  हैं .*

*मैं अपना उदाहरण ही आपको देता हूँ मै अपने लाइफ डेवलेपमेंट प्रोग्राम पर पिछले 1-2  सालों से गभींरता से काम कर रहा हूँ, आज मेरी सोच और पिक्चर बिल्कुल स्पष्ट है अपनी ड्रीम लाइफ के बारे में , उसे हासिल करने के बेस्ट तरीकों के बारे में और हर दिन पिछले दिन से बेहतर कैसे करना है।*
*यह  एक प्रक्रिया है जो आपको बड़ी, बहुत बड़ी मनचाही सफलता देती है ।*

*दुनिया में 90% लोग जिंदगी भर संघर्ष करते रहते हैं क्योंकि वे कैरियर को फोकस करते हैं ,उनका सारा फोकस अपने कैरियर डेवलपमेंट पर ही रहता है ,फोकस लाइफ डेवलपमेंट पर होना चाहिये । अगर आ अपना फोकस लाइफ डेवलपमेंट पर कर लेतें हैं तो मनचाही सफलता एक शत प्रतिशत  परिणाम होगी।*

*जिस प्रकार पानी को एक* *निश्चित तापमान पर.गरम करने से भाप बननी शत प्रतिशत निश्चित है ,उसी प्रकार लाइफ डेवलपमेंट भी शत प्रतिशत भी फलदाता है।*

*यह बड़ी बिडंबना है कि इतनी महत्वपूर्ण विषय- लाइफ डेवलपमेंट की जानकारी हमे स्कूल, कालेज में नहीं बतायी जाती है, अध्यापकों, माता पिता को इस बारें में भी कोई जानकारी भी नहीं है।*

*हर व्यक्ति के संघर्षों का 99% कारण यही है।लाइफ डेवलपमेंट प्रोग्राम की शूरूवात सोच को सही दिशा में लाने के साथ शुरू होती है। मेरी सारी पोस्ट  इसी पर केंद्रित हैं।*

*क्या आप भी अपने लिये लाइफ डेवलपमेंट चाहतें हैं?*

अगर हाँ तो साथ बने रहिये और मुझे पूछिये....

आपका शुभाकांक्षी...
रवींद्र भट्ट

किसी भी बड़े कार्य को सम्पन्न करने के लिए उसकी नीव सबसे मजबूत बनानी होती है*

*किसी भी बड़े कार्य को सम्पन्न करने के लिए उसकी नीव सबसे मजबूत बनानी*

कभी किसी काल में किसी नगर में राम और श्याम नामक दो धनी व्यापारी रहते थे. वे दोनों ही अपने धन और वैभव का बड़ा प्रदर्शन करते थे.

एक दिन राम  अपने मित्र श्याम  के घर उससे भेंट करने के लिए गया. राम  ने देखा कि श्याम  का घर बहुत विशाल और तीन मंजिला था. 2,500 साल पहले तीन मंजिला घर होना बड़ी बात थी और उसे बनाने के लिए बहुत धन और कुशल वास्तुकार की आवश्यकता होती थी. राम  ने यह भी देखा कि नगर में सभी निवासी श्याम  के घर को बड़े विस्मय से देखते थे और उसकी बहुत बड़ाई करते थे.

अपने घर वापसी पर राम  बहुत उदास था कि श्याम  के घर ने सभी का ध्यान खींच लिया था. उसने उसी वास्तुकार को बुलवाया जिसने श्याम का घर बनाया था. उसने वास्तुकार से श्याम के घर जैसा ही तीन मंजिला घर बनाने को कहा. वास्तुकार ने इस काम के लिए हामी भर दी और काम शुरू हो गया.

कुछ दिनों बाद राम काम का मुआयना करने के लिए निर्माणस्थल पर गया. जब उसने नींव खोदे जाने के लिए मजदूरों को गहरा गड्ढा खोदते देखा तो वास्तुकार को बुलाया और पूछा कि इतना गहरा गड्ढा क्यों खोदा जा रहा है.

“मैं आपके बताये अनुसार तीन मंजिला घर बनाने के लिए काम कर रहा हूँ”, वास्तुकार ने कहा, “सबसे पहले मैं मजबूत नींव बनाऊँगा, फिर क्रमशः पहली मंजिल, दूसरी मंजिल और तीसरी मंजिल बनाऊंगा.”

“मुझे इस सबसे कोई मतलब नहीं है!”, राम ने कहा, “तुम सीधे ही तीसरी मंजिल बनाओ और उतनी ही ऊंची बनाओ जितनी ऊंची तुमने श्याम के लिए बनाई थी. नींव की और बाकी मंजिलों की परवाह मत करो!”

“ऐसा तो नहीं हो सकता”, वास्तुकार ने कहा.

“ठीक है, यदि तुम यह नहीं करोगे तो मैं किसी और से करवा लूँगा”, राम ने नाराज़ होकर कहा.

उस नगर में कोई भी वास्तुकार नींव के बिना वह घर नहीं बना सकता था, फलतः वह घर कभी न बन पाया.

*अतः किसी भी बड़े कार्य को सम्पन्न करने के लिए उसकी नीव सबसे मजबूत बनानी चाहिए एवं काम को योजनाबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए ।*

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